एसबीआई समेत बैंकों के लोन रिकवरी नियम: EMI का बोझ नहीं, लेकिन रिकवरी के तरीके बदले

अगर आपने किसी बैंक से लोन लिया हुआ है तो आपको भी कभी महसूस किया है कि लोन की EMI भरने से ज्यादा तनाव रिकवरी एजेंट के फोन कॉल्स दे देते हैं, भारत में लाखों मिडिल क्लास,लोअर क्लास की परिवार इस परेशानी से गुजर रह हैं।

अच्छी बात यह है कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने पिछले कुछ समय में लोन रिकवरी को लेकर सख्त गाइडलाइंस जारी की हुई हैं, जो सभी बैंकों पर लागू होती हैं, जिनमें SBI,BOBऔर कई और भी बैंक इनमे भी शामिल है। इन नियमों का मकसद उधार लेने वालों को परेशान होने से बचाना है, न कि EMI माफ करना। EMI तो समय पर चुकानी ही होगी। लेकिन उसमे भी आपको राहत मिल सकती है।

पहले क्या दिक्कत होती थी

जब कोई लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान 90 दिन से ज्यादा लेट हो जाता है, तो अकाउंट NPA माना जाता है। इसके बाद बैंक रिकवरी एजेंट्स को लगा देते थे। जिसमे वो बार बार फोन करके emi मांगना या बिना बताए घर पहुच कर किस्त रासी के लिए परेसान करना।

कई मामलों में शिकायतें आईं है जिनमे की –

  • बार-बार फोन किए जाते थे
  • गलत समय पर कॉल आते थे
  • परिवार या जान-पहचान वालों को फोन कर दिया जाता था
  • कभी-कभी एजेंट घर तक पहुँच जाते थे और दरवाजे पर हल्ला करने जैसे समस्या सामील है-

ऐसी घटनाओं के कारण RBI को सख्ती करनी पड़ी है जिनमे कुछ नए नियम और बदलाव भी कीये गए है।

जाने की अब रिकवरी एजेंट के लिए क्या नियम हैं

RBI के अनुसार बैंक और उनके एजेंटों को एक तय आचार संहिता का पालन करना होता है। मुख्य बातें ये है -:

  • सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद कॉल नहीं किए जा सकते
  • धमकी, गाली-गलौज या दबाव बनाना नियमों के खिलाफ है
  • उधार लेने वाले की प्राइवेसी का सम्मान जरूरी है
  • किसी तीसरे व्यक्ति को जानकारी देना गलत माना जाता है

अगर इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो ग्राहक बैंक में शिकायत कर सकता है और जरूरत पड़े तो RBI तक मामला भी ले जा सकता है।

EMI कम कैसे हो सकती है

अगर किसी वजह से EMI भरना मुश्किल हो रहा है, तो सीधे डिफॉल्ट करने की बजाय बैंक से बात करना बेहतर होता है।

बैंक कई बार ये विकल्प देते हैं:

  • लोन का टेन्योर बढ़ाना
  • EMI को री-स्ट्रक्चर करना
  • कुछ मामलों में मोरेटोरियम

इससे मासिक किस्त कम हो सकती है, हालांकि कुल ब्याज बढ़ सकता है।

प्री-पेमेंट और फ्लोटिंग रेट लोन

फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर ज्यादातर बैंकों में पहले से ही प्री-पेमेंट चार्ज नहीं लिया जाता। इसका मतलब है कि अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा है तो आप लोन जल्दी बंद कर सकते हैं और अलग से पेनल्टी नहीं भी देनी हो सकती है।

क्या EMI न भरना अपराध है?

सामान्य तौर पर लोन न चुका पाना सिविल मामला होता है, क्रिमिनल नहीं, जब तक कि धोखाधड़ी या जानबूझकर गलत जानकारी देने का मामला न हो।

इसलिए डरने के बजाय बैंक से बात करना ज्यादा समझदारी है। लॉजिकली देखे तो इन्हे आपको भरना ही चाहिए, ये मेरा खुद का Opinion है,

राहत के साथ सावधानी भी जरूरी

कुछ जरूरी बातें हमेशा ध्यान रखें:

  • EMI की तारीख और रकम पहले से प्लान करें
  • बजट बनाकर खर्च करें
  • किसी भी कॉल या मैसेज पर व्यक्तिगत जानकारी तुरंत साझा न करें
  • बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से ही जानकारी लें

अगर रिकवरी से जुड़ी शिकायत हो, तो बैंक के कस्टमर केयर या RBI के शिकायत पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है। आप अपने तरफ से कोई भी गलती न करे रिकवरी एजेंट से अच्छे से पेस आए, पहले उन्हे समझना ही बेहतर होता है, और अगर फिर भी न माने तो ही सिकायत दर्ज करे।

निष्कर्ष जैसी या जरूरी बात

ये नियम उधार लेने वालों को परेशान होने से बचाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन जिम्मेदारी अभी भी उधार लेने वाले की ही रहती है। समय पर EMI भरना सबसे आसान और सुरक्षित रास्ता है।

अगर कभी परेशानी आए, तो छिपाने या भागने से बेहतर है बैंक से खुलकर बात करना।

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